एक ईमानदार व्यक्ति

 दो एक साल पहले की बात है जब मैं अपने अंकल के यहां जॉब करता था!

      एक बार मुझे काम के सिलसिले मे विजयवाडा जाना था और मैं जब भी काम के लिए बाहर जाता हूँ,तो तीन बैग लेकर निकलता हूँ जैसे कि एक बैग कपडे का,दूसरा सैंपल बैग और तीसरा जो कि छोटा होता है जिसमे पैसे, सैंपल मोबाइल और आर्डर बुक वगैरह होती है. समय पर विजयवाडा पहुँच गया था और यही रात को मुझे हैदराबाद के लिए निकलना था 8:30 बजे की गाड़ी थी और यहां मुझे रात तक सारे काम भी निपटाने थे जैसे कि शोध जमा करना,ऑर्डर लेने वगैरह वगैरह.

       शाम होने को आ गयी थी और जो मेरे काम थे वह भी सारे लगभग हो गये थे और ठीक 7:00 एक बजे अंकल का फोन आया और कहा कि तेरे पास जितने चेक इकट्ठा हुए वह सब मुझे कुरियर कर दे. मैंने कहा ठीक है कर देता हूं.तो मैं जिस मार्किट मे था वहां हमारा एक व्यापारी थे तो वही बैठकर कूरियर तैयार किया,फिर मैंने उनको पूछा की यहाँ कूरियर वाला कहाँ पर है? तो उन्होंने कहाँ कि बस यहाँ से थोड़ी दुरी पर जाओगे तो एक बड़ी उम्र वाला व्यक्ति टेबल लगाकर बैठे होंगे.मैंने कहा ठीक है तो मै वहा गया और उन कूरियर वाले को कूरियर दे दिया.जो मेरा छोटा बैग है वो मैं हमेशा सैंपल वाले बैग मे रखता था पर समय की कमी के कारण वह भी मैंने अपने हाथ मे ही पकड़ कर रखा था.यह काम निपटाने के बाद वहां से सीधा  रेस्टोरेंट गया और खाना पार्सल लेकर रेल्वे स्टेशन पहुँच गया और अच्छी बात यह रही की समय पर गाड़ी भी मिल गयी.

रेल्वे के सफर मे विजयवाडा से हैदराबाद पहुंचने के लिए करीबबंद 10 एक घंटे का वक़्त लग जाता है.

 अब वक़्त पर हैदराबाद पहुँच गया था और जहा मैं रुकता हूँ वह होटल स्टेशन से ज्यादा दुरी पर नहीं थी इसलिए मैं पैदल ही चला गया होटल तक.डोमेंट्री पहले से बुक की हुयी थी तो सीधे अपने बेड पर गया, थोड़ा आराम किया फिर चाय बाय पीके, स्नान करके तैयार हो गया और इन सब कामों मे 10 बज गये थे और 11 बजे के बाद मार्किट खुल जाते है.

          अब मुझे व्यापारियो की पिछली सूची देखनी थी कि किन किन का शोध बाकी है किनका क्या आर्डर बाकी है वगैरह वगैरह.तो जैसे ही मैंने सैंपल बैग खोला तो छोटा बैग नहीं था जो कि मैं हमेशा उसमे ही रखता थापुरे बैग को अच्छी तरह देखा,कपडे वाले बैग मे देखा,अपने आसपास देखा पर कही नहीं मिला.आधे घंटे तक ढूंढ़ता रहा पर नहीं मिला फिर कुछ सूझ नहीं रहा था तो सीधे अंकल को फ़ोन लगाया और सब कुछ उनको बता दिया.

           अंकल ने मुझे जोर दार फटकार लगायी और कहा कि "तू जवाबदार व्यक्ति नहीं है,तेरा कोई काम ढंग से नहीं होता है,हर बार तू कुछ ना कुछ भूलता रहता है,और यह जितना भी नुकसान हुआ है सब तेरे नाम पे लिखा जायेगा यह वो वगैरह वगैरह. जबकि मैंने तो यह आशा रखी थी कि वे थोड़ा सहयोग करेंगे पर ऐसा कुछ हुआ नहीं अब मैं और ज्यादा परेशान हो गया और दुखी भी बहुत था और यह भी विचार आ रहे थे कि यह सब मेरे हकलाने कि वजह से हुआ है इसी के कारण मेरा ध्यान काम पर नहीं लगता है.अगर मैं नहीं हकलाता तो यह गलती ना होती.

          काम करने का बिलकुल मन नहीं कर रहा था फिर भी थोड़ी हिम्मत की और मार्किट गया. उन व्यापारियो के पास गया जिनका शोध लेना था,आर्डर लेने थे पर अभी भी ध्यान उसी गलती पर अटका हुआ था और इसी के कारण कोई काम अच्छे से नहीं हो पा रहा था. शाम हो गयी थी और ना ही मैंने अभी तक अन्न का एक दाना खाया था.शाम के 7:30 बज रहे थे तब ही अचानक से अंकल का फ़ोन आया और कहने लगे कैसा रहा काम काज? कुछ हुआ या नहीं?

मैंने कहा नहीं कुछ नहीं हुआ फिर झटके से मुझे कहा कि "बैग मिल गया है"

मैंने कहा "क्या"

उन्होंने कहा "हाँ बैग मिल गया है और उसमे जो पैसे, सैंपल मोबाइल वगैरह थे वह भी सब सही सलामत है"

यह सुनकर मानो शरीर मे एक अलग ही ऊर्जा आ गयी, ख़ुशी के मारे पागल सा हो गया, ख़ुशी को कण्ट्रोल नहीं कर पा रहा था क्युकी अगर बैग नहीं मिलता तो वे ज़िन्दगी भर सुनाते रहते इसलिए एक अलग ही खुशी मिल रही थी.फिर खुद को थोड़ा शांत किया और अंकल को पूछा कि "कैसे मिला?"

अंकल ने कहा कि "जिस पार्टी के पास बैठकर तूने कूरियर तैयार किया था उन्ही का फोेन आया था और कहा कि "आपका भाई यहाँ कूरियर वाले के पास बैग भूल गया था तो उन अंकल ने बैग लाकर मुझे दे दिया है और पैसे बैसे सब बराबर है.

       यह सुनकर बहुत अच्छा लगा क्युकी आज के ज़माने मे ईमानदार व्यक्ति बहुत कम है और जो कूरियर वाले अंकल थे उनकी ऑफिस या शॉप कुछ भी नहीं था सिर्फ एक टेबल लगाकर मार्किट मे बैठ थे और उनकी उम्र करीब बंद 70 के ऊपर थी.अगर वह बैग खुद रख लेते तो भी किसी को पता नहीं चलता पर नहीं उन्होंने ईमानदारी दिखाई और वह बैग हमारे व्यापारी को दे दिया शायद ऐसा लग रहा है कि कूरियर वाले अंकल ने मुझे हमारे व्यापारी के दुकान से बाहर आते हुए देखा होगा.

अब जिस व्यापारी के पास बैग था उनको फ़ोन लगाया और कहा कि उन अंकल को मेरी तरफ से धन्यवाद कहना और बैग मे से 500/- रूपये निकाल कर उनको बक्सीस के तौर पर देना.

   इस गलती से मुझे बहुत बड़ी सिख मिली कि हमेशा सोच समझ कर शांति से काम करना चाहिए और लापरवाही कभी नहीं करनी चाहिए नहीं तो इससे बहुत बड़ा नुकशान हो सकता है. और शायद इसके बाद यह गलती दोबारा नहीं हुयी है.

         और उन अंकल से एक चीज जरूर सिख सकते है कि भले हम सफल हो या ना हो पर हमें अपनी ईमानदारी नहीं छोड़नी चाहिए, क्युकी कोई देखे या ना देखे ऊपरवाला जरूर देखता है.


धन्यवाद

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